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Amit Kumar
ham nahin ab to kisi ke hone waale
ham nahin ab to kisi ke hone waale | हम नहीं अब तो किसी के होने वाले
- Amit Kumar
हम
नहीं
अब
तो
किसी
के
होने
वाले
जितना
भी
चाहे
ये
रो
लें
रोने
वाले
हम
थे
इक
मज़दूर
के
बेटे,
खिलौने
मिलते
भी
गर
थे
तो
पत्थर
ढोने
वाले
कैसे
ये
जानेंगे
साँसों
की
घुटन
को
लोग
ये
गमलों
में
पौधे
बोने
वाले
- Amit Kumar
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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उस
वक़्त
भी
अक्सर
तुझे
हम
ढूँढने
निकले
जिस
धूप
में
मज़दूर
भी
छत
पर
नहीं
जाते
Munawwar Rana
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हर
चंद
कि
हैं
अदबार
में
हम
कहते
हैं
खुले
बाज़ार
में
हम
हैं
सब
से
बड़े
संसार
में
हम
मज़दूर
हैं
हम
मज़दूर
हैं
हम
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Asrar Ul Haq Majaz
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हलाल
रिज़्क़
का
मतलब
किसान
से
पूछो
पसीना
बन
के
बदन
से
लहू
निकलता
है
Aadil Rasheed
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उनके
बच्चे
यूँँ
ही
मुरझाएँगे
बैठे
बैठे
ये
जो
मज़दूर
हैं
क्या
खाएँगे
बैठे
बैठे
Salman Zafar
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फ़रिश्ते
से
बढ़
कर
है
इंसान
बनना
मगर
इस
में
लगती
है
मेहनत
ज़ियादा
Altaf Hussain Hali
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मेहनत
से
है
अज़्मत
कि
ज़माने
में
नगीं
को
बे-काविश-ए-सीना
न
कभी
नामवरी
दी
Bahadur Shah Zafar
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बी.ए
भी
पास
हों
मिले
बी-बी
भी
दिल-पसंद
मेहनत
की
है
वो
बात
ये
क़िस्मत
की
बात
है
Akbar Allahabadi
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ये
परिंदे
भी
खेतों
के
मज़दूर
हैं
लौट
के
अपने
घर
शाम
तक
जाएँगे
Bashir Badr
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तर्जुबा
था
सो
दु'आ
की
के
नुकसान
ना
हो
इश्क़
मजदूर
को
मजदूरी
के
दौरान
ना
हो
मैं
उसे
देख
ना
पाता
था
परेशानी
में
सो
दु'आ
करता
था
मर
जाए
परेशान
ना
हो
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Afkar Alvi
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अच्छे
ख़ासे
उदासी
में
बैठे
थे
हम
कैमरा
देख
के
हम
को
हँसना
पड़ा
Amit Kumar
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सारे
पंछी
तो
आख़िर
में
उड़
जाते
हैं
पेड़
बस
देखते
पेड़
कटते
हुए
Amit Kumar
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डर
यहाॅं
सबको
ख़ुद-कुशी
का
है
कैसा
ये
हाल
आदमी
का
है
इश्क़
हो
चाहे
हो
हवस
यारों
खेल
सारा
ये
दो
घड़ी
का
है
काट
लेंगे
ये
साल
तुम
बिन
पर
इक
महीना
जो
फ़रवरी
का
है
इश्क़
हो
तो
ये
ध्यान
रखना
तुम
वक़्त
ये
कौन
सी
सदी
का
है
जाने
देना
जो
जाना
चाहे
गर
अब
कहाॅं
कोई
भी
किसी
का
है
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Amit Kumar
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इक
अजब
सी
हम
शरर
में
आ
गए
हैं
एक
लड़की
के
नज़र
में
आ
गए
हैं
लगता
है
पूछेगी
अब
वो
हाल
मेरा
हम
भी
सद
में
के
असर
में
आ
गए
हैं
इस
तरह
से
पेड़
को
काटे
हैं
हमने
जानवर
जंगल
से
घर
में
आ
गए
हैं
हम
जहाँ
से
निकले
थे
आए
वहीं
फिर
किस
तरह
के
हम
सफ़र
में
आ
गए
हैं
इस
तरह
से
छुप
के
रहते
इन
दिनों
हम
जब
दिखे
तो
हम
ख़बर
में
आ
गए
हैं
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Amit Kumar
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आधे
से
आधा
जब
घटा
होगा
वो
मुझे
छोड़
के
गया
होगा
मैं
तो
ये
सोच
होता
हूँ
पागल
क्या
ही
पागल
वो
सोचता
होगा
चैन
की
नींद
सोने
वाला
वो
सोचो
इक
दिन
बहुत
जगा
होगा
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Amit Kumar
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