teri tasveeron ko dekh pighalti hain | तेरी तस्वीरों को देख पिघलती हैं

  - Amit Sharma Meet
तेरीतस्वीरोंकोदेखपिघलतीहैं
अबयेआँखेंहमसेनहींसँभलतीहैं
हरदिनचेहराअलगतरहकाहोताहै
ग़मकीशक्लेंभीतोरोज़बदलतीहैं
इनख़्वाबोंकासचहोनाक्यामुमकिनहै
जिनकेख़ातिरआँखेंमेरीजलतीहैं
जानेकिसकालहजाउसपरहावीहै
उसकीबातेंअबअंगारउगलतीहैं
दिलकेक़ब्रिस्तानकायारोंक्याकहना
लाशेंबसजज़्बातकीइसमेंपलतीहैं
जबतकहूँमैंज़िंदामिलनेजाओ
लम्हालम्हासाँसेंरोज़निकलतीहैं
उम्मीदोंकासूरजरोज़निकलताहै
शामकेजैसी'मीत'उमीदेंढलतीहैं
  - Amit Sharma Meet
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy