garz padne pe us se maangata hai | ग़रज़ पड़ने पे उस से माँगता है

  - Amit Sharma Meet
ग़रज़पड़नेपेउससेमाँगताहै
ख़ुदाहोताहैया'नीमानताहै
कईदिनसेशरारतहीनहींकी
मिरेअंदरकाबच्चालापताहै
बुरेमाहौलसेगुज़राहैयेदिल
मोहब्बतलफ़्ज़सेहीकाँपताहै
येकच्चीउम्रके'आशिक़कोदेखो
ज़रारूठेकलाईकाटताहै
अभीमंज़िलदिखाईभीनहींदी
अभीसेहीतूइतनाहाँफताहै
गुनाहोंकीसज़ासबदूसरोंको
गरेबाँकौनअपनाझाँकताहै
अजबकारीगरीहै'मीत'उसकी
बदनकोरूहपेवोटांकताहै
  - Amit Sharma Meet
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