apni aankhoñ ko kabhi theek se dhoya hi nahin | अपनी आँखों को कभी ठीक से धोया ही नहीं

  - Amit Sharma Meet
अपनीआँखोंकोकभीठीकसेधोयाहीनहीं
सचकहूँआजतलकखुलकेमैंरोयाहीनहीं
मेरेलफ़्ज़ोंसेमिरादर्दझलकजाताहै
जबकिइसदर्दकोआवाज़मेंबोयाहीनहीं
इकदफ़अ'नींदमेंख़्वाबोंकाजनाज़ादेखा
बा'दउसकेमैंकभीचैनसेसोयाहीनहीं
तंगगलियोंमेंमोहब्बतकीभटकतेहैंसब
मैंनेकोशिशतोकईबारकीखोयाहीनहीं
साँसरुकजाएतड़पतेहुएयादोंमेंकहीं
हिज्रकाबोझकभीदिलपेयूँँढोयाहीनहीं
मैंकहानीमेंनयामोड़भीलासकताथा
मैंनेकिरदारकोआँसूमेंभिगोयाहीनहीं
अपनेरिश्तेकाभीअब'मीत'बिखरनातयथा
हमनेविश्वासकेधागेमेंपिरोयाहीनहीं
  - Amit Sharma Meet
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