duniya ko jab nazdeeki se dekha hai | दुनिया को जब नज़दीकी से देखा है

  - Amit Sharma Meet
दुनियाकोजबनज़दीकीसेदेखाहै
तबसमझायेसबकुछखेल-तमाशाहै
हाथोंकीदो-चारलकीरेंपढ़करवो
मुझसेबोलाआगेसबकुछअच्छाहै
उससेबसइकबारमिलापरहैराँहूँ
दिलमेंतबसेघरकरकेवोबैठाहै
काग़ज़परदिलकीतस्वीरबनाईजब
उसनेपूछायेकिसशयकानक़्शाहै
सोचरहाहूँमैंइसकासौदाकरदूँ
उसकीयादोंकाजोदिलमेंमलबाहै
दोनोंपहलूमेंहीहारछिपीइसमें
मेरेहाथोंमेंअबयेजोसिक्काहै
इसख़ातिरमैंरोज़मशक़्क़तकरताहूँ
आसानीसेक्याहासिलहोपाताहै
जबक़ुदरतनेथोड़ाआजनवाज़ातो
सारेमुझसेपूछेहैंतूकैसाहै
'मीत'यहाँअपनेतोनामकेअपनेहैं
अन-जानोंसेरिश्तादिलकागहराहै
  - Amit Sharma Meet
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