mazid ik baar par baar-e-giraan rakha gaya hai | मज़ीद इक बार पर बार-ए-गिराँ रक्खा गया है

  - Ameer Imam
मज़ीदइकबारपरबार-ए-गिराँरक्खागयाहै
ज़मींजोतेरेउपरआसमाँरक्खागयाहै
कभीतूचीख़करआवाज़देतोजानजाऊँ
मिरेज़िंदानमेंतुझकोकहाँरक्खागयाहै
मिरीनींदोंमेंरहतीहैसदातिश्ना-दहानी
मिरेख़्वाबोंमेंइकदरियारवाँरक्खागयाहै
हवाकेसाथफूलोंसेनिकलनेकीसज़ामें
भटकतीख़ुशबुओंकोबे-अमाँरक्खागयाहै
मगरयेदिलबहलताहीनहींगोइसकेआगे
तुम्हारेब'अदयेसाराजहाँरक्खागयाहै
  - Ameer Imam
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