kabhi to bante hue aur kabhi bigadte hue | कभी तो बनते हुए और कभी बिगड़ते हुए

  - Ameer Imam
कभीतोबनतेहुएऔरकभीबिगड़तेहुए
येकिसकेअक्सहैंतन्हाइयोंमेंपड़तेहुए
अजीबदश्तहैइसमेंकोईफूलख़ार
कहाँपेगयामैंतितलियाँपकड़तेहुए
मिरीफ़ज़ाएँहैंअबतकग़ुबार-आलूदा
बिखरगयाथावोकितनामुझेजकड़तेहुए
जोशामहोतीहैहररोज़हारजाताहूँ
मैंअपनेजिस्मकीपरछाइयोंसेलड़तेहुए
येइतनीरातगएआजशोरहैकैसा
होंजिसेक़ब्रोंपेपत्थरकहींउखड़तेहुए
  - Ameer Imam
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