zameen ke saare manaazir se kat ke sota hooñ | ज़मीं के सारे मनाज़िर से कट के सोता हूँ

  - Ameer Imam
ज़मींकेसारेमनाज़िरसेकटकेसोताहूँ
मैंआसमाँकेसफ़रसेपलटकेसोताहूँ
मैंजम्अ''करताहूँशबकेसियाहीक़तरोंको
ब-वक़्त-ए-सुब्हफिरउनकोपलटकेसोताहूँ
तलाशधूपमेंकरताहूँसारादिनख़ुदको
तमाम-रातसितारोंमेंबटकेसोताहूँ
कहाँसुकूँकिशब-ओ-रोज़घूमनाउसका
ज़राज़मीनकेमेहवरसेहटकेसोताहूँ
तिरेबदनकीख़लाओंमेंआँखखुलतीहै
हवाकेजिस्मसेजबजबलिपटकेसोताहूँ
मैंजागजागकेरातेंगुज़ारनेवाला
इकऐसीरातभीआतीहैडटकेसोताहूँ
  - Ameer Imam
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