raushni le ke kahii chaand kahii taaron se | रौशनी ले के कहीं चाँद कहीं तारों से

  - Ameer Ahmad Khusro
रौशनीलेकेकहींचाँदकहींतारोंसे
हमभीगुज़रेथेकभीवक़्तकेबाज़ारोंसे
ज़िंदगीतुझसेतिरेग़मसेतोइंकारनहीं
हाँमगरलज़्ज़त-ए-ग़मछिनगईग़म-ख़्वारोंसे
अज़्मत-ए-रफ़्ताकीमिटतीहुईतस्वीरहैंहम
हमकोलटकाइएगिरतीहुईदीवारोंसे
इससेपहलेकिछिड़ेज़िक्र-ए-वफ़ाप्यारकीबात
मशवराकरलोज़रावक़्तकीसरकारोंसे
चाँदजिसवक़्तउतरआताहैपैमानोंमें
मय-कदेबातकियाकरतेहैंमय-ख़्वारोंसे
हमकोबे-दामभीबिकजानेकाफ़नआताहै
बातकहनेकीनहींहैयेख़रीदारोंसे
वहीतन्हाईकीबातेंहैंवहीज़ातकेग़म
मुझकोशिकवाहैमिरेदूरकेफ़नकारोंसे
अब्र-ए-रहमतकोलिएअपनीनज़रमें'ख़ुसरव'
हमभीतोदश्तसेगुज़रेकभीकोहसारोंसे
  - Ameer Ahmad Khusro
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