thakan se door har ik manzil-e-hayaat rahe | थकन से दूर हर इक मंज़िल-ए-हयात रहे

  - Ameer Ahmad Khusro
थकनसेदूरहरइकमंज़िल-ए-हयातरहे
तिराख़यालसफ़रमेंजोसाथसाथरहे
मिटादियाउन्हेंख़ुदवक़्तकेतक़ाज़ोंने
जोलोगवक़्तकेमरहून-ए-इल्तिफ़ातरहे
हरएकहादसा-ए-ज़ीस्तसेगुज़रजाएँ
हमारेहाथमेंजोज़िंदगीकाहाथरहे
जोअपनीज़ातमेंदरियाभीथेसमुंदरभी
लब-ए-फ़ुरातवहीतिश्ना-ए-फ़ुरातरहे
वोअजनबीकीतरहआजहमसेमिलतेहैं
तमामउम्रजो'ख़ुसरव'हमारेसाथरहे
  - Ameer Ahmad Khusro
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