kaun kahtaa hai sar-e-arsh-e-bareen rehta hai | कौन कहता है सर-ए-अर्श-ए-बरीं रहता है

  - Ameer Ahmad Khusro
कौनकहताहैसर-ए-अर्श-ए-बरींरहताहै
वोतोइकदर्दहैजोदिलकेक़रींरहताहै
चाँदपरअपनेक़दमआपनेक्यूँँरोकलिए
एकगामऔरकिसूरजभीयहींरहताहै
शम्अ'कीतरहपिघलताहूँमैंलम्हालम्हा
मेरेएहसासमेंइकशो'ला-जबींरहताहै
दिलकेदरवाज़ेपेअबकिसकोसदादेतेहो
मुद्दतेंगुज़रींयहाँकोईनहींरहताहै
वोजोसूरजकोहथेलीपेलिएफिरताथा
उन्हींतारीकसीगलियोंमेंकहींरहताहै
जिनफ़ज़ाओंमेंतमन्नाओंकादमघटताहै
हाँमिरेदौरकाफ़नकारवहींरहताहै
जानेयेशौक़कीहैकौनसीमंज़िल'ख़ुसरव'
मैंकहींरहताहूँदिलमेराकहींरहताहै
  - Ameer Ahmad Khusro
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