chaar-soo shahar men maqtal ka samaan hai ab ke | चार-सू शहर में मक़्तल का समाँ है अब के

  - Ameer Ahmad Khusro
चार-सूशहरमेंमक़्तलकासमाँहैअबके
अपनेसाएपेभीक़ातिलकागुमाँहैअबके
जोकभीशहरमेंख़ुर्शीद-ब-कफ़भरताथा
कोईबतलाएकिवोशख़्सकहाँहैअबके
कहकशाँलफ़्ज़ोंकीहोंटोंपेबिखरनेदीजे
दूरतकज़ेहनकीगलियोंमेंधुआँहैअबके
लोगआँखोंमेंनएख़्वाबलिएफिरतेहैं
कुछहोनेपेभीहोनेकागुमाँहैअबके
मेरेमाज़ीनेमुझेयादकियाहैशायद
इकख़लिशहैकिक़रीब-ए-रग-ए-जाँहैअबके
वक़्तक्यावक़्तसेउम्मीद-ए-करमक्या'ख़ुसरव'
वक़्तहालातकाख़ुदमर्सियाँ-ख़्वाँहैअबके
  - Ameer Ahmad Khusro
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