seharaaon ki pyaas bujhaane | सहराओं की प्यास बुझाने

  - Ameer Ahmad Khusro
सहराओंकीप्यासबुझाने
कबआएबरसातजाने
मुझकोमेरीयाददिलाने
आएहैंकुछदोस्तपुराने
जानेघरकिसकिसकेजलेंगे
निकलेहैंवोजश्नमनाने
ख़्वाबोंकीवादीमेंमिलेहैं
बीतेलम्हेगुज़रेज़माने
वक़्तकेटूटेआईनेमें
चेहरेहैंसबजानेपहचाने
तुमसेमिलेतोयादआयाहै
देखेथेकुछख़्वाबसुहाने
रातकीबाँहोंमेंखुलतेहैं
तेरीयादोंकेमयख़ाने
उम्मीदेंघरछोड़चुकीथीं
कबआएहैंहोशठिकाने
दश्तकीजलतीरेतपे'ख़ुसरव'
वक़्तलिखेगाअपनेफ़साने
  - Ameer Ahmad Khusro
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