ghubaar-o-gard ne samjha hai rehnuma mujh ko | ग़ुबार-ओ-गर्द ने समझा है रहनुमा मुझ को

  - Ameeq Hanafi
ग़ुबार-ओ-गर्दनेसमझाहैरहनुमामुझको
तलाशकरताफिराहैयेक़ाफ़िलामुझको
तवीलराह-ए-सफ़रपरहैंफूटफूटपड़ा
क्यूँँसमझतेमिरेपैरआबलामुझको
शिकस्त-ए-दिलकीसदाहूँबिखरभीजानेदे
ख़ुतूत-ओ-रंगकीज़ंजीरमतपिन्हामुझको
ज़मीनपरहैसमुंदरफ़लकपेअब्र-ए-ग़ुबार
उतारतीहैकहाँदेखिएहवामुझको
सुकूततर्क-ए-तअ'ल्लुक़काइकगराँलम्हा
बनागयाहैसदाओंकासिलसिलामुझको
वोदूरदूरसेअबक्यूँँमुझेजलाताहै
क़रीबकेबहुतजोबुझागयामुझको
रचाकेएकतिलिस्म-ए-सवाबित-ओ-सय्यार
कशिशमेंअपनीबुलानेलगाख़लामुझको
  - Ameeq Hanafi
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