manzil-e-shams-o-qamar se guzre | मंज़िल-ए-शम्स-ओ-क़मर से गुज़रे

  - Ameen Rahat Chugtai
मंज़िल-ए-शम्स-ओ-क़मरसेगुज़रे
जबतिरीराहगुज़रसेगुज़रे
शबकीगातीहुईतन्हाईमें
कितनेतूफ़ाँथेजोसरसेगुज़रे
वहींपतझड़नेपड़ावडाला
क़ाफ़िलेगुलकेजिधरसेगुज़रे
हरतरफ़सब्तहैंक़दमोंकेनिशाँ
कोईकिसराहगुज़रसेगुज़रे
किसक़दरख़ुदपेहमेंप्यारआया
आजजबअपनीनज़रसेगुज़रे
सुर्ख़ी-ए-गुलसेभीचौंकेगुल-रुख़
वोज़मानेभीनज़रसेगुज़रे
दश्त-ओ-सहराकाभीदामनसिमटा
तेरेदीवानेजिधरसेगुज़रे
ख़ुद-निगरहोगए'राहत'हमभी
आजवोकाशइधरसेगुज़रे
  - Ameen Rahat Chugtai
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy