mirii aankhoñ men manzar dhul raha tha | मिरी आँखों में मंज़र धुल रहा था

  - Ambarin Salahuddin
मिरीआँखोंमेंमंज़रधुलरहाथा
सर-ए-मिज़्गाँसिताराघुलरहाथा
बहुतसेलफ़्ज़दस्तकदेरहेथे
सुकूत-ए-शबमेंरस्ताखुलरहाथा
जोउगलावक़्तकेआतिश-फ़िशाँने
वोलम्हाख़ाकमेंफिररुलरहाथा
हुआथाक़ुर्मुज़ीपानीजहाँसे
वहाँकलशामतकइकपुलरहाथा
तुम्हारेनामसेआगेकारस्ता
अजलकीआहटोंमेंखुलरहाथा
  - Ambarin Salahuddin
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