असीर-ए-ख़्वाबनईजुस्तुजूकेदरखोलें
हवापेहाथरखेंऔरअपनेपरखोलें
समेटेअपनेसराबोंमेंबारिशोंकाजमाल
कहाँकाक़स्दहैयेराज़ख़ुश-नज़रखोलें
उसेभुलानेकीफिरसेकरेंनईसाज़िश
चलोकिआजकोईनामा-ए-दीगरखोलें
उलझतीजातीहैंगिर्हेंअधूरेलफ़्ज़ोंकी
हमअपनीबातोंकेसारेअगरमगरखोलें
जोख़्वाबदेखनाता'बीरखोजनाहोकभी
तोपहलेरातकेलिपटेहुएभँवरखोलें
इकईंटसामनेदीवारसेनिकालेंअब
चलोकिफिरसेनयाकोईदर्द-ए-सरखोलें