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Ambar
thoda sa maghroor hi tha to achha tha
thoda sa maghroor hi tha to achha tha | थोड़ा सा मग़रूर ही था तो अच्छा था
- Ambar
थोड़ा
सा
मग़रूर
ही
था
तो
अच्छा
था
सोचता
हूँ
मैं
दूर
ही
था
तो
अच्छा
था
क्या
क्या
सितम
किए
हैं
इस
नज़दीकी
ने
अब
लगता
है
दूर
ही
था
तो
अच्छा
था
- Ambar
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रोने
को
तो
ज़िंदगी
पड़ी
है
कुछ
तेरे
सितम
पे
मुस्कुरा
लें
Firaq Gorakhpuri
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क्या
सितम
है
कि
अब
तिरी
सूरत
ग़ौर
करने
पे
याद
आती
है
Jaun Elia
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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दुश्मनों
की
जफ़ा
का
ख़ौफ़
नहीं
दोस्तों
की
वफ़ा
से
डरते
हैं
Hafeez Banarasi
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डाली
है
ख़ुद
पे
ज़ुल्म
की
यूँँ
इक
मिसाल
और
उसके
बग़ैर
काट
दिया
एक
साल
और
Subhan Asad
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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जफ़ा
के
ज़िक्र
पे
तुम
क्यूँँ
सँभल
के
बैठ
गए
तुम्हारी
बात
नहीं
बात
है
ज़माने
की
Majrooh Sultanpuri
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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निगल
ही
चुका
था
जफ़ा
का
निवाला
अना
फिर
तमाशा
नया
कर
रही
है
Amaan Pathan
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कौन
उठाएगा
तुम्हारी
ये
जफ़ा
मेरे
बाद
याद
आएगी
बहुत
मेरी
वफ़ा
मेरे
बाद
Ameer Minai
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साथ
वो
जो
चला
नहीं
करती
बिन
मेरे
भी
रहा
नहीं
करती
उस
में
होगी
ज़रूर
कोई
बात
मेरी
सब
सेे
बना
नहीं
करती
कोई
रोता
तो
कोई
हँसता
है
ज़ीस्त
सबका
भला
नहीं
करती
ये
नमाज़ें
ख़फ़ा
सी
लगती
हैं
मेरे
हक़
में
दु'आ
नहीं
करती
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Ambar
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दे
तू
सकता
वफ़ा
नहीं
मुझको
ख़ैर
कोई
गिला
नहीं
मुझको
तेरे
बस
की
नहीं
रही
ये
बात
जानता
हूँ
बता
नहीं
मुझको
मैं
नहीं
डरता
तेरी
आँखों
से
आँखें
अपनी
दिखा
नहीं
मुझको
हँसते
हँसते
कहीं
न
रो
जाऊँ
याद
उसकी
दिला
नहीं
मुझको
चाहने
से
मुझे
है
लगता
डर
जिसको
चाहा
मिला
नहीं
मुझको
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Ambar
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मेरे
भी
दो
चार
बने
हैं
मतलब
के
सब
यार
बने
हैं
Ambar
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मुक़म्मल
हो
मेरे
जज़्बात
चाहूँ
तुम्हें
चाहूँ
तुम्हारा
साथ
चाहूँ
न
झगड़ा
हो
कभी
मज़हब
को
लेकर
मुहब्बत
की
सदा
इक
ज़ात
चाहूँ
क़रीबी
दोस्तों
में
याद
रखना
वफ़ा
की
बस
यही
सौग़ात
चाहूँ
मेरे
दिल
में
बसी
है
इक
तमन्ना
तेरे
मेरे
मिलन
की
रात
चाहूँ
सभी
के
सामने
अपना
कहूँ
मैं
तुम्हें
इतनी
मेरी
औक़ात
चाहूँ
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Ambar
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छोड़
गई
है
जाते
जाते
निशानी
वो
जाने
कैसे
ये
करने
की
ठानी
वो
मेरी
नहीं
तो
उसकी
होगी
मानी
वो
पर
ख़ुश
हूँ
मैं
बात
किसी
की
मानी
वो
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