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Ambar
de tu saka wafa nahin mujhko
de tu saka wafa nahin mujhko | दे तू सकता वफ़ा नहीं मुझको
- Ambar
दे
तू
सकता
वफ़ा
नहीं
मुझको
ख़ैर
कोई
गिला
नहीं
मुझको
तेरे
बस
की
नहीं
रही
ये
बात
जानता
हूँ
बता
नहीं
मुझको
मैं
नहीं
डरता
तेरी
आँखों
से
आँखें
अपनी
दिखा
नहीं
मुझको
हँसते
हँसते
कहीं
न
रो
जाऊँ
याद
उसकी
दिला
नहीं
मुझको
चाहने
से
मुझे
है
लगता
डर
जिसको
चाहा
मिला
नहीं
मुझको
- Ambar
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
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शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
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भले
हैं
फ़ासले
क़ुर्बत
से
ख़ौफ़
लगता
है
ये
क्या
बला
है
जो
ऐसी
विरानी
क़ैद
हुई
Prashant Beybaar
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
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अपनी
तन्हाई
मिरे
नाम
पे
आबाद
करे
कौन
होगा
जो
मुझे
उस
की
तरह
याद
करे
Parveen Shakir
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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वफ़ा
उल्फ़त
मुहब्बत
आशिक़ी
में
मिलेगी
यारों
जन्नत
आशिक़ी
में
बिज़ी
रहते
हैं
सुबह-ओ-शाम
सारे
नहीं
मिलती
है
फ़ुर्सत
आशिक़ी
में
लगा
के
दिल
किसी
सुंदर
बदन
से
सभी
करते
हैं
उल्फ़त
आशिक़ी
में
उसे
मजबूर
करना
दिल
दुखाना
नहीं
करना
ये
हरकत
आशिक़ी
में
चले
ये
दौर
यूँँ
ही
उम्र
भर
को
हमें
भी
थी
ये
हसरत
आशिक़ी
में
कोई
ख़ुदस
भी
प्यारा
हो
सके
है
करोगे
तुम
भी
हैरत
आशिक़ी
में
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Ambar
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इतना
सजधज
के
आओगे
तो
कैसे
तुमको
छोड़
के
दुनियादारी
देखें
हम
Ambar
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तेरी
बातें
मुझे
बेचैन
की
हैं
तेरा
भी
हाल
कुछ
ऐसा
ही
है
ना
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मेरे
और
उसके
रिश्ते
को
यूँँ
समझो
बस
इक
हाँ
की
दूरी
ने
बर्बाद
किया
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मेरी
यादें
सब
मिटा
कर
ये
बता
क्या
करेगा
दूर
जा
कर
ये
बता
देखता
है
बस
मुझे
ये
है
ख़बर
क्या
मिला
नज़रें
चुरा
कर
ये
बता
आशिक़ी
में
दर्द
पाने
के
सिवा
क्या
किए
हम
पास
आ
कर
ये
बता
और
बातें
बाद
में
होगी
अभी
ख़ुश
तो
है
ना
दिल
लगा
कर
ये
बता
क्या
कभी
तू
भी
कहीं
मेरी
तरह
रोता
है
आँसू
छुपा
कर
ये
बता
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