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Ambar
teraa rooth jaana sitam gar mujhe
teraa rooth jaana sitam gar mujhe | तेरा रूठ जाना सितम गर मुझे
- Ambar
तेरा
रूठ
जाना
सितम
गर
मुझे
बड़ा
ही
रुलाया
ख़ुदा
की
क़सम
- Ambar
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चोट
खाई
थी
एक
बार
मगर
उम्र
भर
को
बिखर
गए
हैं
हम
Munazzah Noor
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तेरे
लगाए
हुए
ज़ख़्म
क्यूँँ
नहीं
भरते
मेरे
लगाए
हुए
पेड़
सूख
जाते
हैं
Tehzeeb Hafi
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बिछड़े
तो
रख
रखाव
भी
करना
नहीं
पड़ा
ताज़ा
किसी
को
घाव
भी
करना
नहीं
पड़ा
बस
देख
कर
ही
उसको
परिंदे
उतर
गए
उसको
तो
आओ
आओ
भी
करना
नहीं
पड़ा
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Azbar Safeer
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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शाख़-दर-शाख़
होती
है
ज़ख़्मी
जब
परिंदा
शिकार
होता
है
Indira Varma
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
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जो
सारे
ज़ख़्म
मेरे
भर
दिया
करता
उसी
के
नाम
का
ख़ंजर
बनाया
है
Parul Singh "Noor"
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ये
बात
अभी
सबको
समझ
आई
नहीं
है
दीवाना
है
दीवाना
तमन्नाई
नहीं
है
दिल
मेरा
दुखाकर
ये
मुझे
तेरा
मनाना
मरहम
है
फ़क़त
ज़ख़्म
की
भरपाई
नहीं
है
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Vikram Gaur Vairagi
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तुम
जैसी
हो
बस
मेरी
हो
समझी
ना
तुम
बस
मेरी
हो
यूँँ
समझो
तुम
जीवन
ही
हो
तुम
ही
दिल
हो
धड़कन
भी
हो
सपना
हो
या
पास
खड़ी
हो
इतनी
प्यारी
क्यूँँ
लगती
हो
प्यार
है
मुझ
से
क्या
कहती
हो
फिर
से
सुन
लो
बस
मेरी
हो
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Ambar
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मेरे
हिस्से
की
भी
दु'आ
ले
गया
तुम्हें
कोई
हम
से
चुरा
ले
गया
Ambar
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रस्ते
से
मुड़
जाया
कर
रोज़
न
मिलने
आया
कर
पिज़्ज़ा
बरगर
खा
ले
पर
जानम
भाव
न
खाया
कर
मेरे
लिए
इतना
ही
कर
याद
हमेशा
आया
कर
धूप
में
बन
के
बादल
तू
राहत
वाली
छाया
कर
तन्हाई
में
जब
तुझको
सोचूँ
तू
आ
जाया
कर
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Ambar
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मुक़म्मल
हो
मेरे
जज़बात
चाहूँ
तुम्हें
चाहूँ
तुम्हारा
साथ
चाहूँ
न
झगड़ा
हो
कभी
मज़हब
को
लेकर
मुहब्बत
की
सदा
इक
ज़ात
चाहूँ
क़रीबी
दोस्तों
में
याद
रखना
वफ़ा
की
बस
यही
सौग़ात
चाहूँ
मेरे
दिल
में
बसी
है
इक
तमन्ना
तेरे
मेरे
मिलन
की
रात
चाहूँ
सभी
के
सामने
अपना
कहूँ
मैं
तुम्हें
इतनी
मेरी
औक़ात
चाहूँ
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एक
वा'दा
मुझ
सेे
भी
कर
तू
हमेशा
रहना
मेरा
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