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Ambar
tum jaisi ho
tum jaisi ho | तुम जैसी हो
- Ambar
तुम
जैसी
हो
बस
मेरी
हो
समझी
ना
तुम
बस
मेरी
हो
यूँँ
समझो
तुम
जीवन
ही
हो
तुम
ही
दिल
हो
धड़कन
भी
हो
सपना
हो
या
पास
खड़ी
हो
इतनी
प्यारी
क्यूँँ
लगती
हो
प्यार
है
मुझ
से
क्या
कहती
हो
फिर
से
सुन
लो
बस
मेरी
हो
- Ambar
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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पलट
कर
लौट
आने
में
मज़ा
भी
है
मुहब्बत
भी
बुलाकर
देख
लो
शायद
पलट
कर
लौट
आएँ
हम
Gaurav Singh
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हमारे
बाद
तेरे
इश्क़
में
नए
लड़के
बदन
तो
चू
मेंगे
ज़ुल्फ़ें
नहीं
सँवारेंगे
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Vikram Gaur Vairagi
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ये
इश्क़
भी
मुझे
लगता
है
बेटियों
की
तरह
जो
माँगता
है
अमूमन
उसे
नहीं
मिलता
Dipendra Singh 'Raaz'
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किसी
भी
शख़्स
के
झूठे
दिलासे
में
नहीं
आती
कहानी
हो
अगर
लंबी
तराशे
में
नहीं
आती
जहाँ
में
अब
कहाँ
कोई
जो
मजनूँ
की
तरह
चाहे
मोहब्बत
इसलिए
भी
अब
तमाशे
में
नहीं
आती
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Ansar Ethvi
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तुम्हीं
से
प्यार
मुझको
इसलिए
है
ज़माना
आज़मा
कर
आ
गया
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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प्रेम
के
सौग़ात
थे
उस
में
तुमने
केवल
क़ाफ़िया
देखा
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Ambar
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फिरसे
रिश्ता
निभा
सकते
हो
चाहो
गर
तो
मना
सकते
हो
अब
तो
इसकी
आदत
सी
है
तुम
भी
छोड़
के
जा
सकते
हो
ख़ाब
कि
जिस
में
हम
और
तुम
थे
सच
कर
के
दिखला
सकते
हो
मैंने
तुम
सेे
कब
ये
कहा
था
तारे
तोड़
के
ला
सकते
हो
लफ्ज़
वही
इज़हार-ए-वफ़ा
का
फिर
से
क्या
दोहरा
सकते
हो
'अंबर'
तुम
से
कुछ
नहीं
होगा
बस
बातें
ही
बना
सकते
हो
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Ambar
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बात
होगी
बेरुख़ी
से
कब
तलक
कोई
रूठे
ज़िन्दगी
से
कब
तलक
इक
न
इक
दिन
वो
भी
समझेगा
मुझे
ये
कहूँ
मैं
हर
किसी
से
कब
तलक
ये
ज़माना
और
भी
कुछ
माँगे
है
हो
गुज़ारा
आशिक़ी
से
कब
तलक
बात
तो
करनी
ही
होगी
एक
दिन
चुप
रहोगे
ख़ामुशी
से
कब
तलक
जिस्म-ओ-जाँ
इक
दिन
मेरी
लुट
जाएगी
यूँँ
ही
जीऊँ
बे-दिली
से
कब
तलक
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रस्ते
से
मुड़
जाया
कर
रोज़
न
मिलने
आया
कर
पिज़्ज़ा
बरगर
खा
ले
पर
जानम
भाव
न
खाया
कर
मेरे
लिए
इतना
ही
कर
याद
हमेशा
आया
कर
धूप
में
बन
के
बादल
तू
राहत
वाली
छाया
कर
तन्हाई
में
जब
तुझको
सोचूँ
तू
आ
जाया
कर
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मेरे
शाने
के
बराबर
उनके
शाने
हो
गए
देखते
ही
देखते
बच्चे
सयाने
हो
गए
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