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Ambar
ek vaa'da mujhse bhi kar
ek vaa'da mujhse bhi kar | एक वा'दा मुझ सेे भी कर
- Ambar
एक
वा'दा
मुझ
सेे
भी
कर
तू
हमेशा
रहना
मेरा
- Ambar
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नींद
के
दायरे
में
हाज़िर
हूँ
ख़्वाब
के
रास्ते
में
हाज़िर
हूँ
याद
है
इश्क़
था
कभी
मुझ
सेे
मैं
उसी
सिलसिले
में
हाज़िर
हूँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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ज़रा
सी
देर
आँखों
में
चली
जाए
तुम्हारी
याद
बहुत
दिन
हो
गए
दिल
का
मुझे
झाड़ू
लगाना
है
Tanoj Dadhich
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हमारे
दिल
में
तुम
गहरे
न
उतरो
किसी
की
याद
का
गोदाम
होगा
Tanoj Dadhich
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
Salman Zafar
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वर्षों
की
सब
याद
सजा
के
रक्खी
है
घर
में
बस
सामान
नहीं
है,
समझा
कर
Shivam Tiwari
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हम
ही
में
थी
न
कोई
बात
याद
न
तुम
को
आ
सके
तुम
ने
हमें
भुला
दिया
हम
न
तुम्हें
भुला
सके
Hafeez Jalandhari
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तेरी
मजबूरियाँ
दुरुस्त
मगर
तूने
वा'दा
किया
था
याद
तो
कर
Nasir Kazmi
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अपनी
तन्हाई
मिरे
नाम
पे
आबाद
करे
कौन
होगा
जो
मुझे
उस
की
तरह
याद
करे
Parveen Shakir
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वो
कोई
दोस्त
था
अच्छे
दिनों
का
जो
पिछली
रात
से
याद
आ
रहा
है
Nasir Kazmi
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नए
नए
जब
हम
दुनिया
में
आए
थे
थोड़े
रोए
चीखे
और
चिल्लाए
थे
दुख
तो
ये
है
वो
ही
हमको
समझा
नईं
जिसको
हम
ने
सारे
राज़
बताए
थे
पहले
कर
ली
हम
से
लड़ाई
बात
न
की
अब
कहते
हैं
तुम
ही
आग
लगाए
थे
अच्छा
माना
सारी
ग़लती
मेरी
थी
तुम
ही
कौन
सा
जलती
आग
बुझाए
थे
सोचा
इक
मौक़ा
ही
दे
दूँ
लेकिन
तुम
कहाँ
ख़बर
थी
ताने
देने
आए
थे
'
अंबर'
अपना
कटना
बिलकुल
लाज़िम
था
पहली
बार
मुहब्बत
में
जो
आए
थे
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Ambar
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फिरसे
रिश्ता
निभा
सकते
हो
चाहो
गर
तो
मना
सकते
हो
अब
तो
इसकी
आदत
सी
है
तुम
भी
छोड़
के
जा
सकते
हो
ख़ाब
कि
जिस
में
हम
और
तुम
थे
सच
कर
के
दिखला
सकते
हो
मैंने
तुम
सेे
कब
ये
कहा
था
तारे
तोड़
के
ला
सकते
हो
लफ्ज़
वही
इज़हार-ए-वफ़ा
का
फिर
से
क्या
दोहरा
सकते
हो
'अंबर'
तुम
से
कुछ
नहीं
होगा
बस
बातें
ही
बना
सकते
हो
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Ambar
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इस
सेे
पहले
कि
ये
मजबूर
कर
दे
या
इलाही
मुझे
तू
दूर
कर
दे
Ambar
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मैं
करता
हूँ
बस
इतना
ही
काफ़ी
है
मैं
ने
कब
ये
चाहा
तू
भी
प्यार
करे
Ambar
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अब
लगी
है
आग
सीने
में
जुदा
होने
के
बाद
कौन
बोला
था
तुझे
तू
प्यार
का
इक़रार
कर
Ambar
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