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Ambar
jab bhi koii sachcha 'aashiq rota hai
jab bhi koii sachcha 'aashiq rota hai | जब भी कोई सच्चा 'आशिक़ रोता है
- Ambar
जब
भी
कोई
सच्चा
'आशिक़
रोता
है
सच
कहता
हूँ
याद
तुम्हारी
आती
है
- Ambar
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क़ल्ब-ए-हज़ी
मता-ए-जाँ
यूँँ
शाद
कीजिए
कसरत
के
साथ
आप
हमें
याद
कीजिए
दौलत
में
चाहते
हो
इज़ाफा
अगर
शजर
तो
बेकसों
यतीमों
की
इमदाद
कीजिए
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Shajar Abbas
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ज़ब्त
का
ऐसे
इम्तिहान
न
ले
ऐ
मेरी
जान
मेरी
जान
न
ले
Khalid Sajjad
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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इक
ये
भी
तो
अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ
है
ऐ
चारागरो
दर्द
बढ़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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बोसा
लिया
जो
उस
लब-ए-शीरीं
का
मर
गए
दी
जान
हम
ने
चश्मा-ए-आब-ए-हयात
पर
Ameer Minai
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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जब
तलक
अनजान
थे
मेहफ़ूज़
थे
जान
लेना
जानलेवा
हो
गया
Vishal Bagh
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तुम्हारा
नाम
लेने
से
बड़ी
तकलीफ़
होती
है
मिरी
ख़ुशियाँ
तुम्हीं
से
थीं
बहुत
अफ़सोस
है
मुझको
Ambar
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तुझ
सेे
रिश्ता
कुछ
पल
में
ही
टूट
गया
साथ
रहेंगे
जीवन
भर
का
वा'दा
था
Ambar
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मुहब्बत
ने
सिखाया
है
मुझे
ये
नहीं
करना
मुहब्बत
अब
किसी
से
Ambar
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बात
होगी
बेरुख़ी
से
कब
तलक
कोई
रूठे
ज़िन्दगी
से
कब
तलक
इक
न
इक
दिन
वो
भी
समझेगा
मुझे
ये
कहूँ
मैं
हर
किसी
से
कब
तलक
ये
ज़माना
और
भी
कुछ
माँगे
है
हो
गुज़ारा
आशिक़ी
से
कब
तलक
बात
तो
करनी
ही
होगी
एक
दिन
चुप
रहोगे
ख़ामुशी
से
कब
तलक
जिस्म-ओ-जाँ
इक
दिन
मेरी
लुट
जाएगी
यूँँ
ही
जीऊँ
बे-दिली
से
कब
तलक
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Ambar
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बेमतलब
का
यूँँ
ही
ग़ुस्सा
कर
कर
के
मैंने
इक
दिन
ऐसे
ही
मर
जाना
है
Ambar
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