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Ambar
bematlab ka yuñ hi gussa kar kar ke
bematlab ka yuñ hi gussa kar kar ke | बेमतलब का यूँँ ही ग़ुस्सा कर कर के
- Ambar
बेमतलब
का
यूँँ
ही
ग़ुस्सा
कर
कर
के
मैंने
इक
दिन
ऐसे
ही
मर
जाना
है
- Ambar
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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चेहरा
धुँदला
सा
था
और
सुनहरे
झुमके
थे
बादल
ने
कानों
में
चाँद
के
टुकड़े
पहने
थे
इक
दूजे
को
खोने
से
हम
इतना
डरते
थे
ग़ुस्सा
भी
होते
तो
बातें
करते
रहते
थे
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Vikram Gaur Vairagi
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ले
लो
बोसा
अपना
वापस
किस
लिए
तकरार
की
क्या
कोई
जागीर
हम
ने
छीन
ली
सरकार
की
Akbar Merathi
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एक
ग़लत-फ़हमी
ने
ज़िंदा
रक्खा
है
शे'र
मेरे
वो
चुपके
चुपके
पढ़ती
है
Tanoj Dadhich
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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ये
जो
दुनिया
है
इसे
इतनी
इजाज़त
कब
है
हम
पे
अपनी
ही
किसी
बात
का
ग़ुस्सा
उतरा
Abhishek shukla
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तिरी
ही
तरह
से
तुझको
रुलाए
है
बद्दुआ
तिरा
दिल
टूट
जाए
Parul Singh "Noor"
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किसी
ने
कहा
था
टूटी
हुई
नाव
में
चलो
दरिया
के
साथ
आप
की
रंजिश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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तुम
को
आता
है
प्यार
पर
ग़ुस्सा
मुझ
को
ग़ुस्से
पे
प्यार
आता
है
Ameer Minai
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बोसा-ए-रुख़्सार
पर
तकरार
रहने
दीजिए
लीजिए
या
दीजिए
इंकार
रहने
दीजिए
Hafeez Jaunpuri
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याद
उसको
नहीं
करूँँगा
मैं
भूलना
भी
नहीं
उसे
आसान
Ambar
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मुक़म्मल
हो
मेरे
जज़बात
चाहूँ
तुम्हें
चाहूँ
तुम्हारा
साथ
चाहूँ
न
झगड़ा
हो
कभी
मज़हब
को
लेकर
मुहब्बत
की
सदा
इक
ज़ात
चाहूँ
क़रीबी
दोस्तों
में
याद
रखना
वफ़ा
की
बस
यही
सौग़ात
चाहूँ
मेरे
दिल
में
बसी
है
इक
तमन्ना
तेरे
मेरे
मिलन
की
रात
चाहूँ
सभी
के
सामने
अपना
कहूँ
मैं
तुम्हें
इतनी
मेरी
औक़ात
चाहूँ
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मेरे
दिल
में
आन
बसा
है
फिर
से
कोई
मेहमान
बसा
है
इक
दिन
तुझ
सेे
बदला
लूँगा
तेरा
वो
अपमान
बसा
है
ज़्यादा
अकड़
दिखाने
वाला
जल्दी
ही
शमशान
बसा
है
खाते
हिन्दुस्तान
की
हो
पर
दिल
में
पाकिस्तान
बसा
है
कौन
यहाँ
है
सब
सेे
उत्तम
किस
में
सारा
ज्ञान
बसा
है
'अंबर'
के
सीने
में
केवल
सारा
हिन्दुस्तान
बसा
है
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Ambar
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जो
भी
करते
सही
किए
होते
तुझको
दिल
से
बरी
किए
होते
माफ़
करता
कभी
ख़ुदा
न
मुझे
तुझ
सेे
जो
बेरुख़ी
किए
होते
जो
किया
था
हमारे
साथ
उसने
काश
हम
भी
वही
किए
होते
करते
हो
ऐतबार
ग़ैरों
पे
हम
पे
भी
तो
कभी
किए
होते
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Ambar
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तुम
जैसी
हो
बस
मेरी
हो
समझी
ना
तुम
बस
मेरी
हो
यूँँ
समझो
तुम
जीवन
ही
हो
तुम
ही
दिल
हो
धड़कन
भी
हो
सपना
हो
या
पास
खड़ी
हो
इतनी
प्यारी
क्यूँँ
लगती
हो
प्यार
है
मुझ
से
क्या
कहती
हो
फिर
से
सुन
लो
बस
मेरी
हो
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