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Ambar
mere dil men aan basa hai
mere dil men aan basa hai | मेरे दिल में आन बसा है
- Ambar
मेरे
दिल
में
आन
बसा
है
फिर
से
कोई
मेहमान
बसा
है
इक
दिन
तुझ
सेे
बदला
लूँगा
तेरा
वो
अपमान
बसा
है
ज़्यादा
अकड़
दिखाने
वाला
जल्दी
ही
शमशान
बसा
है
खाते
हिन्दुस्तान
की
हो
पर
दिल
में
पाकिस्तान
बसा
है
कौन
यहाँ
है
सब
सेे
उत्तम
किस
में
सारा
ज्ञान
बसा
है
'अंबर'
के
सीने
में
केवल
सारा
हिन्दुस्तान
बसा
है
- Ambar
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चल
गया
होगा
पता
ये
आपको
बे-वफ़ा
कहते
हैं
लड़के
आपको
इक
ज़रा
से
हुस्न
पर
इतनी
अकड़
तू
समझती
क्या
है
अपने
आपको
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Kushal Dauneria
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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उम्र
जो
बे-ख़ुदी
में
गुज़री
है
बस
वही
आगही
में
गुज़री
है
Gulzar Dehlvi
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उसने
पूछा
था
पहले
हाल
मेरा
फिर
किया
देर
तक
मलाल
मेरा
मैं
वफ़ा
को
हुनर
समझता
था
मुझपे
भारी
पड़ा
कमाल
मेरा
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Subhan Asad
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हाँ
ठीक
है
मैं
अपनी
अना
का
मरीज़
हूँ
आख़िर
मिरे
मिज़ाज
में
क्यूँँ
दख़्ल
दे
कोई
Jaun Elia
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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ये
हुनर
जो
आ
जाए,
आपका
ज़माना
है
पाँव
किसके
छूने
हैं,
सर
कहाँ
झुकाना
है
Astitwa Ankur
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हम
ने
क़ुबूल
कर
लिया
अपना
हर
एक
जुर्म
अब
आप
भी
तो
अपनी
अना
छोड़
दीजिए
Harsh saxena
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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सौ
दलीलें
पेश
करने
बाद
भी
तन्हा
रहा
बिन
कहे
कोई
समझ
जाए
तो
क्या
ही
बात
हो
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गर
मिल
जाती
उल्फ़त
भी
यूँँ
सस्ते
में
फ़र्क
न
पड़ता
मुझको
तुझ
बिन
रहने
में
मेरे
कारण
कभी
नहीं
तू
रोएगा
ये
भी
तो
शामिल
था
तेरे
वादे
में
बुरा
किसी
इंसान
को
कहने
से
पहले
शक़्ल
भी
अपनी
देख
लिया
कर
शीशे
में
गर
मिल
जाओ
दिल
की
बातें
चार
करें
लेकिन
हम
सेे
मिलना
कहीं
अकेले
में
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Ambar
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बेमतलब
का
यूँँ
ही
ग़ुस्सा
कर
कर
के
मैंने
इक
दिन
ऐसे
ही
मर
जाना
है
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आज
है
रोज़
डे
सुना
था
मैं
तेरी
ख़ातिर
गुलाब
लाया
हूँ
Ambar
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जिस्म
पे
मरने
वाले
तो
मिल
जाएँगे
दिल
पे
मरने
वाला
मिलना
मुश्किल
है
Ambar
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