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Ambar
gar mil jaati ulfat bhi yuñ saste men
gar mil jaati ulfat bhi yuñ saste men | गर मिल जाती उल्फ़त भी यूँँ सस्ते में
- Ambar
गर
मिल
जाती
उल्फ़त
भी
यूँँ
सस्ते
में
फ़र्क
न
पड़ता
मुझको
तुझ
बिन
रहने
में
मेरे
कारण
कभी
नहीं
तू
रोएगा
ये
भी
तो
शामिल
था
तेरे
वादे
में
बुरा
किसी
इंसान
को
कहने
से
पहले
शक़्ल
भी
अपनी
देख
लिया
कर
शीशे
में
गर
मिल
जाओ
दिल
की
बातें
चार
करें
लेकिन
हम
सेे
मिलना
कहीं
अकेले
में
- Ambar
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तमाम
फ़र्क़
मोहब्बत
में
एक
बात
के
हैं
वो
अपनी
ज़ात
का
नईं
है
हम
उस
की
ज़ात
के
हैं
Pallav Mishra
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दर्द
सहने
का
अलग
अंदाज़
है
जी
रहे
हैं
हम
अदा
की
ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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वो
मेरी
दुनिया
का
हिस्सा
थी
मेरी
दुनिया
नहीं
इक
शजर
कटने
से
वन
वीरान
हो
जाएगा
क्या
Balmohan Pandey
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मैं
अपने
आप
में
गहरा
उतर
गया
शायद
मिरे
सफ़र
से
अलग
हो
गई
रवानी
मिरी
Abbas Tabish
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अलग
बैठे
थे
फिर
भी
आँख
साक़ी
की
पड़ी
हम
पर
अगर
है
तिश्नगी
कामिल
तो
पैमाने
भी
आएँगे
Majrooh Sultanpuri
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जानती
हो
कि
क्या
हुआ
है
तुम्हें
इश्क़
का
रोग
लग
गया
है
तुम्हें
तुमको
देखें
तो
देखते
जाएँ
देखने
का
अलग
मज़ा
है
तुम्हें
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Pravin Rai
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हुस्न
उनका
सादगी
में
कुछ
अलग
महका
किया
मैंने
धड़कन
से
कहा
धड़को
मगर
आराम
से
Ishq Allahabadi
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जो
अपना
हिस्सा
भी
औरों
में
बाँट
देता
है
इक
ऐसे
शख़्स
के
हिस्से
में
आ
गए
थे
हम
Ismail Raaz
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मेरी
शोहरत
के
तक़ाज़े
ही
अलग
थे
ताबिश
गुमशुदा
रहते
हुए
नाम
कमाना
था
मुझे
Tousief Tabish
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चले
भी
जाओ
अब
दिल
से
हमारे
करो
ख़ाली
अभी
कमरा
हमारा
Ambar
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आज
है
रोज़
डे
सुना
था
मैं
तेरी
ख़ातिर
गुलाब
लाया
हूँ
Ambar
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सभी
ख़्वाहिशों
का
ख़ज़ाना
मिले
तुम्हें
कोई
तुम
सा
दीवाना
मिले
बता
दूँ
मैं
दिल
की
हर
इक
दास्ताँ
अगर
कोई
मुझ
को
बहाना
मिले
न
जाए
कभी
बचपना
आपका
हर
इक
ख़्वाब
का
आशियाना
मिले
कोई
पंछी
उलफ़त
का
भूखा
न
हो
सभी
को
मुहब्बत
का
दाना
मिले
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Ambar
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रस्ते
से
मुड़
जाया
कर
रोज़
न
मिलने
आया
कर
पिज़्ज़ा
बरगर
खा
ले
पर
जानम
भाव
न
खाया
कर
मेरे
लिए
इतना
ही
कर
याद
हमेशा
आया
कर
धूप
में
बन
के
बादल
तू
राहत
वाली
छाया
कर
तन्हाई
में
जब
तुझको
सोचूँ
तू
आ
जाया
कर
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Ambar
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दिल
जला
है
क्या
करूँँ
मैं
इश्क़
सा
है
क्या
करूँँ
मैं
बस
तुम्हें
ही
बस
तुम्हें
ही
चाहता
है
क्या
करूँँ
मैं
बात
दिल
की
बोलने
से
डर
लगा
है
क्या
करूँँ
मैं
दिल
हमारा
एक
नाज़ुक
आईना
है
क्या
करूँँ
मैं
मुझ
से
हर
दम
बोलता
है
बोलता
है
क्या
करूँँ
मैं
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