baitha hai sogwaar sitamgar ke shahar men | बैठा है सोगवार सितमगर के शहर में

  - Amar Singh Figar
बैठाहैसोगवारसितमगरकेशहरमें
किसकोपुकारेआईनापत्थरकेशहरमें
बेजानहींफ़ज़ाओंकाहैरतमेंडूबना
इतनासुकूतऔरसुख़न-वरकेशहरमें
इसदौरमेंउसीकोहुनर-मंदमानिए
जीनानहींपड़ाजिसेमरमरकेशहरमें
मंज़िलक़रीबआईतोरस्ताभुलागया
फिरतेहैंख़ाकछानतेरहबरकेशहरमें
सूरजनज़रबचाकेतोगुज़राथामगर
उतरींनहींशुआएँमुक़द्दरकेशहरमें
इंसाँकहूँउन्हेंकिफ़रिश्तोंकानामदूँ
जोलोगदर्द-मंदहैंबे-घरकेशहरमें
शायदनिकलहीआएकोईचारा-गर'फ़िगार'
इकबारऔरदेखसदाकरकेशहरमें
  - Amar Singh Figar
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