कलएकशख़्सजोअच्छे-भलेलिबासमेंथा
बरहनाआजवोउतराहुआगिलासमेंथा
हमआफ़्ताब-ए-दरख़्शाँजिसेसमझतेथे
वोएकवहमकाजुगनूहवसकीघासमेंथा
ज़मीन-ओ-अर्शकीतक़्सीमकेज़मानेमें
बशरअसीर-ए-जुनूँथाकहाँहवासेमेंथा
अज़लसेपहलेहीधुनथीहुसूल-ए-पैकरकी
येकाएनातकाख़ाकामिरेक़यासमेंथा
मैंक्यासुलगतेसमुंदरसेमाँगतापानी
वोख़ुदभीएकज़मानेसेग़र्क़प्यासमेंथा
उसेनसीबकफ़नभीनहींहुआआख़िर
किहिस्से-दारजोउसखेतकीकपासमेंथा
हमउससवालकाअबतकजवाबदेनसके
जोइक'फ़िगार'कीपुर-अश्कचश्म-ए-यासमेंथा