na vo jazbaat ki lahren na ehsaasaat ka dariyaa | न वो जज़्बात की लहरें न एहसासात का दरिया

  - Amar Singh Figar
वोजज़्बातकीलहरेंएहसासातकादरिया
लिएफिरताहूँआँखोंमेंअजबख़दशातकादरिया
मचलतीशोख़मौजोंकोमैंअपनेनामक्यूँँलिक्खूँ
किआख़िरख़ुश्कहोगामौसम-ए-बरसातकादरिया
किसेमा'लूमयेकश्तीलगेकिसघाटपरजाकर
बहालेजाएक्याजानेकिधरहालातकादरिया
कहाँइसआँखकाजुगनूकिचमकेभीतोछुपनेको
कहाँहमबेकसोंकीबातिनीज़ुल्मातकादरिया
हवाएँचुपख़लावीराँफ़ज़ाग़मगींसफ़रमुश्किल
रवाँहद्द-ए-नज़रतकजब्रकेलम्हातकादरिया
ज़बाँकीख़ामुशीतक़रीरकोदफ़नानहींसकती
नहींरुकता'फ़िगार'अलफ़ाज़-ओ-तख़लीक़ातकादरिया
  - Amar Singh Figar
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