raah-e-hasti ke har ik mod se bach kar nikle | राह-ए-हस्ती के हर इक मोड़ से बच कर निकले

  - Amanullah Khalid
राह-ए-हस्तीकेहरइकमोड़सेबचकरनिकले
अहल-ए-दानिशसेतोदीवानेहीबेहतरनिकले
वक़्तकीतेज़हवाओंनेअजबमोड़लिया
फूलसेहाथजोथेउनमेंभीपत्थरनिकले
तेरीयादोंकेसहारेजोगुज़ारेहमने
वोहीलम्हातफ़क़तअपनामुक़द्दरनिकले
हमनेग़ैरोंकेभीअश्कोंकोलियादामनपर
चाहेख़ुदग़मकेसमुंदरमेंनहाकरनिकले
उनकीफ़रियादकाआहोंकाअसरहोगा
अपनेहाथोंसेजोघरअपनाजलाकरनिकले
ग़मज़मानेकीजफ़ाओंकाकरेंक्या'ख़ालिद'
जबगरेबानहीकाँटोंसेसजाकरनिकले
  - Amanullah Khalid
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