rooh ko raah-e-adam men mira tan yaad aaya | रूह को राह-ए-अदम में मिरा तन याद आया

  - Amanat Lakhnavi
रूहकोराह-ए-अदममेंमिरातनयादआया
दश्त-ए-ग़ुर्बतमेंमुसाफ़िरकोवतनयादआया
चुटकियाँदिलमेंमिरेलेनेलगानाख़ुन-ए-इश्क़
गुल-बदनदेखकेउसगुलकाबदनयादआया
वहमहीवहममेंअपनीहुईऔक़ातबसर
कमर-ए-यारकोभूलेतोदहनयादआया
बर्ग-ए-गुलदेखकेआँखोंमेंतिरेफिरगएलब
ग़ुंचाचटकातोमुझेलुत्फ़-ए-सुख़नयादआया
दर-ब-दरफिरकेदिलाघरकीहमेंक़द्रहुई
राह-ए-ग़ुर्बतमेंजोभूलेतोवतनयादआया
आहक्यूँँखेंचकेआँखोंमेंभरआएआँसू
क्याक़फ़समेंतुझेमुर्ग़-ए-चमनयादआया
फिर'अमानत'मिरादिलभूलगयाऐशतरब
फिरमुझेरौज़ा-ए-सुल्तान-ए-ज़मनयादआया
  - Amanat Lakhnavi
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