subh-e-visaal-e-zeest ka naqsha badal gaya | सुब्ह-ए-विसाल-ए-ज़ीस्त का नक़्शा बदल गया

  - Amanat Lakhnavi
सुब्ह-ए-विसाल-ए-ज़ीस्तकानक़्शाबदलगया
मुर्ग़-ए-सहरकेबोलतेहीदमनिकलगया
दामनपेलोटनेलगेगिरगिरकेतिफ़्ल-ए-अश्क
रोएफ़िराक़मेंतोदिलअपनाबहलगया
दुश्मनभीगरमरेतोख़ुशीकानहींमहल
कोईजहाँसेआजगयाकोईकलगया
सूरतरहीशक्लग़म्ज़ावोअदा
क्यादेखेंअबतुझेकिवोनक़्शाबदलगया
क़ासिदकोउसनेक़त्लकियापुर्ज़ेकरकेख़त
मुँहसेजोउसकेनामहमारानिकलगया
मिलजाओगरतोफिरवहीबाहमहोंसोहबतें
कुछतुमबदलगएहोकुछमैंबदलगया
मुझदिलजलेकीनब्ज़जोदेखीतबीबने
कहनेलगाकिआहमिराहाथजलगया
जीतारहाउठानेकोसद
मेंफ़िराक़के
दमवस्लमेंतिरा'अमानत'निकलगया
  - Amanat Lakhnavi
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