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Aman Mishra 'Anant'
hadein sab tod bhaagunga kisi din
hadein sab tod bhaagunga kisi din | हदें सब तोड़ भागूँगा किसी दिन
- Aman Mishra 'Anant'
हदें
सब
तोड़
भागूँगा
किसी
दिन
नया
रस्ता
बना
लूँगा
किसी
दिन
मैं
या
तो
मार
दूँगा
तुम
सभी
को
या
ख़ुद
को
मार
डालूँगा
किसी
दिन
- Aman Mishra 'Anant'
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अगर
तुम
हो
तो
घबराने
की
कोई
बात
थोड़ी
है
ज़रा
सी
बूँदा-बाँदी
है
बहुत
बरसात
थोड़ी
है
ये
राह-ए-इश्क़
है
इस
में
क़दम
ऐसे
ही
उठते
हैं
मोहब्बत
सोचने
वालों
के
बस
की
बात
थोड़ी
है
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Abrar Kashif
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मक़ाम
'फ़ैज़'
कोई
राह
में
जचा
ही
नहीं
जो
कू-ए-यार
से
निकले
तो
सू-ए-दार
चले
Faiz Ahmad Faiz
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तिरे
सिवा
भी
कहीं
थी
पनाह
भूल
गए
निकल
के
हम
तिरी
महफ़िल
से
राह
भूल
गए
Majrooh Sultanpuri
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मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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Himanshi babra KATIB
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बाद
तेरे
नहीं
कोई
हमें
मंज़िल
की
तलब
हमने
सोचा
है
कि
हम
राह
भटक
जाएँगे
Prince
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मंज़िल
मिली
तो
उसकी
कमी
हमको
खा
गई
सामान
रास्ते
में
जो
खोना
पड़ा
हमें
Abbas Qamar
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चलते
हुए
मुझ
में
कहीं
ठहरा
हुआ
तू
है
रस्ता
नहीं
मंज़िल
नहीं
अच्छा
हुआ
तू
है
Abhishek shukla
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हम
जान
से
जाएँगे
तभी
बात
बनेगी
तुम
से
तो
कोई
राह
निकाली
नहीं
जाती
Wasi Shah
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दीवार
क्या
गिरी
मिरे
ख़स्ता
मकान
की
लोगों
ने
मेरे
सेहन
में
रस्ते
बना
लिए
Sibt Ali Saba
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काम
की
बात
मैंने
की
ही
नहीं
ये
मेरा
तौर-ए-ज़िंदगी
ही
नहीं
Jaun Elia
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प्रेम
की
बात
जब
भी
होती
है
दिल
में
इक
बेदिली
सी
होती
है
तुम
जो
सो
पाओ
तो
बता
देना
चैन
की
नींद
कैसी
होती
है
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Aman Mishra 'Anant'
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आना
मत
तू
याराँ
रस्ते
मेरे
अब
हूँ
नइ
मैं
बस
में
खुदके
मेरे
मुझको
ख़ुशियाँ
देने
वाली
लड़की
तूने
दुख
छीने
है
मुझ
सेे
मेरे
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Aman Mishra 'Anant'
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मर्द
हो
तो
शान
से
मर्दानगी
का
मान
रखना
औरतों
के
उन
दिनों
में
औरतों
का
ध्यान
रखना
मुझको
ग़ालिब
मीर
तो
समझे
नहीं
उसने
कहा
था
तुम
अगर
शायर
बनो
तो
शे'र
को
आसान
रखना
लाख
घर
देखे
मगर
हमको
तो
भाई
ये
सहूलत
बंद
रौशनदान
रखना
कमरे
को
वीरान
रखना
हम
से
जो
वादे
हुए
वो
टूटते
हैं
हर
घड़ी
पर
हर
वचन
का
मान
रखना
हाथ
में
जब
पान
रखना
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Aman Mishra 'Anant'
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व्यर्थ
ही
सुर्ख़ियाँ
नहीं
मिलती
दान
में
तालियाँ
नहीं
मिलती
एक
की
नौकरी
नहीं
लगती
पाँच
को
रोटियाँ
नहीं
मिलती
वरना
मैं
भी
ख़रीद
लेता
माँ
शहर
में
लोरियाँ
नहीं
मिलती
तुम
इसे
मेला
कैसे
कहते
हो
जब
यहाँ
चूड़ियाँ
नहीं
मिलती
आज
वो
फूल
भी
नहीं
खिलते
आज
वो
तितलियाँ
नहीं
मिलती
केक
मिलता
है
जन्मदिन
पर
अब
क्यूँ
कहीं
बूंदियाँ
नहीं
मिलती
पिछले
सब
कर्म
देखे
जाते
हैं
ऐसे
ही
बेटियाँ
नहीं
मिलती
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Aman Mishra 'Anant'
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ये
दुनिया
ही
मुझे
क्या
क्या
बुलाती
है
कि
माँ
तो
आज
भी
लल्ला
बुलाती
है
Aman Mishra 'Anant'
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