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Aman Mishra 'Anant'
prem ki baat jab bhi hoti hai
prem ki baat jab bhi hoti hai | प्रेम की बात जब भी होती है
- Aman Mishra 'Anant'
प्रेम
की
बात
जब
भी
होती
है
दिल
में
इक
बेदिली
सी
होती
है
तुम
जो
सो
पाओ
तो
बता
देना
चैन
की
नींद
कैसी
होती
है
- Aman Mishra 'Anant'
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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जैसे
तू
हुक्म
करे
दिल
मिरा
वैसे
धड़के
ये
घड़ी
तेरे
इशारों
से
मिला
रक्खी
है
Anwar Masood
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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देखिए
होगा
श्री-कृष्ण
का
दर्शन
क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग
में
दिल
गोपियों
का
है
बेकल
Mohsin Kakorvi
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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ये
इक
रोज़
बिछड़
जाने
का
डर
मौला
डाल
गया
है
मेरे
मन
में
घर
मौला
या
तो
उसको
लिख
मेरी
क़िस्मत
में
तू
या
फिर
मेरे
सजदे
वापस
कर
मौला
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Aman Mishra 'Anant'
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मैं
तुझ
सेे
एक
रिश्ता
चाहता
हूँ
वही
जो
मैं
निभाना
चाहता
हूँ
भले
कितनी
दूँ
मुँह
पे
बद-दुआएँ
मैं
अंदर
से
तो
अच्छा
चाहता
हूँ
मुझे
भी
खाद
पानी
मिट्टी
दे
दे
मेरे
माली
मैं
खिलना
चाहता
हूँ
जहाँ
पर
लोग
सारे
दौड़ते
है
मैं
उन
रस्तों
पे
चलना
चाहता
हूँ
हूँ
इक
भटकी
हुई
नौका
मैं
जैसे
सभी
से
बस
किनारा
चाहता
हूँ
उसे
आती
नहीं
रोटी
बनानी
दुल्हन
जिसको
बनाना
चाहता
हूँ
किसी
भूखे
को
अपनी
रोटी
देकर
ख़ुशी
से
भूखा
रहना
चाहता
हूँ
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Aman Mishra 'Anant'
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प्रेम
के
आसक्त
करते
वेदना
का
जाप
है
हम
अभागों
पर
लगा
पीड़ा
का
कोई
श्राप
है
इसका
कोई
दुख
नहीं
है
रूष्ट
सारे
लोग
हैं
किंतू
क्रोधित
सब
सेे
ज़्यादा
हम
सेे
अपना
आप
है
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Aman Mishra 'Anant'
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मैंने
उसके
बालों
पर
कविता
की
उसने
मेरे
गालों
पर
कविता
की
किसने
दुख
समझा
है
हम
जैसों
का
किसने
टूटे
हालों
पर
कविता
की
सबने
गुण
गाए
है
तलवारों
के
किसने
बोलो
ढालों
पर
कविता
की
उसने
ही
फेंका
है
पुल
से
कचरा
जिसने
गंदे
नालों
पर
कविता
की
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Aman Mishra 'Anant'
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हूँ
यूँँ
टूटा
नहीं
था
जानता
मैं
मुझे
मेरी
हँसी
से
ख़ुश
लगा
मैं
उसे
मिलना
तो
था
बेबाक
होकर
वो
आई
सामने
तो
बिछ
गया
मैं
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Aman Mishra 'Anant'
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