zindagi se mirii is tarah mulaqaat hui | ज़िंदगी से मिरी इस तरह मुलाक़ात हुई

  - Alqama Shibli
ज़िंदगीसेमिरीइसतरहमुलाक़ातहुई
लबहिलेआँखमिलीऔरकोईबातहुई
दर्दकीधूपनहींयादकासायाभीनहीं
अबतोक़िस्मतमेरीबे-रंगी-ए-हालातहुई
सिर्फ़कलहीनहींइसदौरमेंभीदीदा-वरी
नज़्र-ए-औहामहुईसैद-ए-रिवायातहुई
कलतोमेहवरथेमिरीज़ातकेयेकौन-ओ-मकाँ
काएनातआजजोसिमटीतोमिरीज़ातहुई
सरकोफोड़ाकिएपत्थरसेसमुंदरसेलड़े
सुब्हयूँँशामहुईशामसेयूँँरातहुई
घरमिरादेखलियासैल-ए-बलाने'शिबली'
आगहीक्याहुईइकदर्दकीसौग़ातहुई
  - Alqama Shibli
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