na aate ha | न आते हमें इस में तकरार क्या थी

  - Allama Iqbal
आतेहमेंइसमेंतकरारक्याथी
मगरवा'दाकरतेहुएआरक्याथी
तुम्हारेपयामीनेसबराज़खोला
ख़ताइसमेंबंदेकीसरकारक्याथी
भरीबज़्ममेंअपने'आशिक़कोताड़ा
तिरीआँखमस्तीमेंहुश्यारक्याथी
तअम्मुलतोथाउनकोआनेमेंक़ासिद
मगरयेबतातर्ज़-ए-इंकारक्याथी
खिंचेख़ुद-बख़ुदजानिब-ए-तूरमूसा
कशिशतेरीशौक़-ए-दीदारक्याथी
कहींज़िक्ररहताहै'इक़बाल'तेरा
फ़ुसूँथाकोईतेरीगुफ़्तारक्याथी
  - Allama Iqbal
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