gesu-e-taabdaar ko aur bhi taabdaar kar | गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर

  - Allama Iqbal
गेसू-ए-ताबदारकोऔरभीताबदारकर
होशख़िरदशिकारकरक़ल्बनज़रशिकारकर
इश्क़भीहोहिजाबमेंहुस्नभीहोहिजाबमें
यातोख़ुदआश्कारहोयामुझेआश्कारकर
तूहैमुहीत-ए-बे-कराँमैंहूँज़रासीआबजू
यामुझेहम-कनारकरयामुझेबे-कनारकर
मैंहूँसदफ़तोतेरेहाथमेरेगुहरकीआबरू
मैंहूँख़ज़फ़तोतूमुझेगौहर-ए-शाहवारकर
नग़्मा-ए-नौ-बहारअगरमेरेनसीबमेंहो
उसदम-ए-नीम-सोज़कोताइरक-ए-बहारकर
बाग़-ए-बहिश्तसेमुझेहुक्म-ए-सफ़रदियाथाक्यूँँ
कार-ए-जहाँदराज़हैअबमिराइंतिज़ारकर
रोज़-ए-हिसाबजबमिरापेशहोदफ़्तर-ए-अमल
आपभीशर्मसारहोमुझकोभीशर्मसारकर
  - Allama Iqbal
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