मुझेआह-ओ-फ़ुग़ान-ए-नीम-शबकाफिरपयामआया
थमऐरह-रौकिशायदफिरकोईमुश्किलमक़ामआया
ज़रातक़दीरकीगहराइयोंमेंडूबजातूभी
किइसजंगाहसेमैंबनकेतेग़-ए-बे-नियामआया
येमिसरालिखदियाकिसशोख़नेमेहराब-ए-मस्जिदपर
येनादाँगिरगएसज्दोंमेंजबवक़्त-ए-क़यामआया
चलऐमेरीग़रीबीकातमाशादेखनेवाले
वोमहफ़िलउठगईजिसदमतोमुझतकदौर-ए-जामआया
दिया'इक़बाल'नेहिन्दीमुसलमानोंकोसोज़अपना
येइकमर्द-ए-तन-आसाँथातन-आसानोंकेकामआया
उसी'इक़बाल'कीमैंजुस्तुजूकरतारहाबरसों
बड़ीमुद्दतकेबा'दआख़िरवोशाहींज़ेर-ए-दामआया