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Ali Mohammed Shaikh
der se hi aa gaya ham ko duniya ka chalan
der se hi aa gaya ham ko duniya ka chalan | देर से ही आ गया हम को दुनिया का चलन
- Ali Mohammed Shaikh
देर
से
ही
आ
गया
हम
को
दुनिया
का
चलन
झूठ
भी
कहते
नहीं
और
सदाकत
छोड़
दी
- Ali Mohammed Shaikh
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खुला
फ़रेब-ए-मोहब्बत
दिखाई
देता
है
अजब
कमाल
है
उस
बे-वफ़ा
के
लहजे
में
Iftikhar Arif
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अब
इन
हुदूद
में
लाया
है
इंतिज़ार
मुझे
वो
आ
भी
जाएँ
तो
आए
न
ऐतबार
मुझे
Khumar Barabankvi
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वो
आफ़ताब
लाने
का
देकर
हमें
फ़रेब
हम
सेे
हमारी
रात
के
जुगनू
भी
ले
गया
Rajesh Reddy
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ऐसा
बदला
हूँ
तिरे
शहर
का
पानी
पी
कर
झूट
बोलूँ
तो
नदामत
नहीं
होती
मुझ
को
Shahid Zaki
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किसी
उम्मीद
का
ये
इस्तिआरा
जान
पड़ता
है
कि
तन्हा
ही
सही
सच
झूट
से
अब
रोज़
लड़ता
है
Tarun Pandey
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तुमको
हम
ही
झूठ
लगेंगे
लेकिन
दरिया
झूठा
है
पहले
हमको
चाँद
मिला
था
फिर
दरिया
को
चाँद
मिला
Abhishar Geeta Shukla
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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किसी
के
झूठ
से
पर्दा
हटाकर
हमारा
सच
बहुत
रोया
था
उस
दिन
Shadab Asghar
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नज़ारे
झूठ
लगते
हैं
किनारे
झूठ
लगते
है
अभी
तेरे
बिना
ये
चाँद
तारे
झूठ
लगते
हैं
Umesh Maurya
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आगे
चलकर
जिस
सेे
शादी
करनी
हो
पहले
दिन
से
झूठ
नहीं
कहते
उस
सेे
Tanoj Dadhich
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होता
है
दर्द
क़ल्ब
के
नज़दीक
सुना
था
तुम
से
मिले
तो
पुख़्ता
हुआ
ठीक
सुना
था
Ali Mohammed Shaikh
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उम्मीद
तलब
हसरत
अरमान
निकल
जाएँ
अल्लाह
करे
दिल
से
ये
शैतान
निकल
जाएँ
दुनिया
की
तिजारत
में
है
आज
मुनाफे
बहुत
ऐसा
न
हो
आख़िर
में
नुकसान
निकल
जाएँ
इस
दौरे
जहालत
में
जंगल
में
बसाके
घर
कोशिश
में
लगे
है
सब
इंसान
निकल
जाए
तू
खोल
दे
फिर
हम
पर
दीवार-ओ-दर-ए-रहमत
घर
बैठे
हुए
या
रब
न
रमज़ान
निकल
जाएँ
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Ali Mohammed Shaikh
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बोलता
हूँ
तो
दुनिया
रंजिशे
जताती
हैं
चुप
रहूँ
तो
लोगों
को
वहशतें
सताती
हैं
Ali Mohammed Shaikh
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सर
पे
दुनिया
के
रखकर
अपना
दुखड़ा
क्या
रोना
दुनिया,
दुनिया
ही
तो
है
किस
किस
का
ग़म
पालेगी
Ali Mohammed Shaikh
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मैं
अकेला
हूँ
मगर
खूब
तजुर्बा
है
मुझे
कारवां
दूर
तलक
कैसे
खींचना
है
मुझे
मैं
हमेशा
से
ही
देता
रहा
तवजजा
तुझे
ग़ौर
से
तू
ही
कहाँ
यार
देखता
है
मुझे
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Ali Mohammed Shaikh
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