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Ali Mohammed Shaikh
ummeed talab hasrat armaan nikal jaayein
ummeed talab hasrat armaan nikal jaayein | उम्मीद तलब हसरत अरमान निकल जाएँ
- Ali Mohammed Shaikh
उम्मीद
तलब
हसरत
अरमान
निकल
जाएँ
अल्लाह
करे
दिल
से
ये
शैतान
निकल
जाएँ
दुनिया
की
तिजारत
में
है
आज
मुनाफे
बहुत
ऐसा
न
हो
आख़िर
में
नुकसान
निकल
जाएँ
इस
दौरे
जहालत
में
जंगल
में
बसाके
घर
कोशिश
में
लगे
है
सब
इंसान
निकल
जाए
तू
खोल
दे
फिर
हम
पर
दीवार-ओ-दर-ए-रहमत
घर
बैठे
हुए
या
रब
न
रमज़ान
निकल
जाएँ
- Ali Mohammed Shaikh
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ऐ
जज़्बा-ए-दिल
गर
मैं
चाहूँ
हर
चीज़
मुक़ाबिल
आ
जाए
मंज़िल
के
लिए
दो
गाम
चलूँ
और
सामने
मंज़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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आज
फिर
दिल
में
तिरे
दीद
की
हसरत
जागी
काश
फिर
काम
कोई
तुझ
से
ज़रूरी
निकले
Nilofar Noor
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क़त्ल
से
पहले
वो
हर
शख़्स
के
दिल
की
हसरत
पूछ
लेता
था
मगर
पूरी
नहीं
करता
था
Vishnu virat
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उसकी
हसरत
है
जिसे
दिल
से
मिटा
भी
न
सकूँ
ढूँडने
उसको
चला
हूँ
जिसे
पा
भी
न
सकूँ
Ameer Minai
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हसरत
भरी
नज़र
से
तुझे
देखता
हूँ
मैं
जिसको
ये
खल
रहा
है
वो
आँखों
को
फोड़
ले
Shajar Abbas
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चलते
हुए
मुझ
में
कहीं
ठहरा
हुआ
तू
है
रस्ता
नहीं
मंज़िल
नहीं
अच्छा
हुआ
तू
है
Abhishek shukla
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जला
है
जिस्म
जहाँ
दिल
भी
जल
गया
होगा
कुरेदते
हो
जो
अब
राख
जुस्तजू
क्या
है
Mirza Ghalib
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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इस
से
पहले
के
मेरे
दिल
से
उतर
जाए
तू
दूर
नज़रों
से
भला
है
के
गुज़र
जाए
तू
मैं
तो
दरिया
हूँ
मेरी
तह
में
तेरा
काम
है
क्या
तू
हवा
है
तो
तेरी
मर्ज़ी
जिधर
जाए
तू
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Ali Mohammed Shaikh
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दुनिया
तो
दीवानी
है
पहले
मन
को
भालेगी
जाते
जाते
पर
हमको
ये
पागल
कर
डालेगी
Ali Mohammed Shaikh
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बात
करके
देखिए
तो
बात
क्यूँ
करते
नहीं
लब
भले
जल
जाएँ
हम
लफ्ज़
से
फिरते
नहीं
दोस्ती
में
दुश्मनी
हो
दुश्मनी
में
दोस्ती
जब
निभाना
हो
मुरव्वत
हम
कहीं
करते
नहीं
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Ali Mohammed Shaikh
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सामने
वो
नज़र
के
रहे
इस
लिए
उसकी
बस्ती
में
ही
काम
पर
लग
गए
वो
तो
आया
नहीं
हाथ
मेरे
मगर
हाथ
इसके
बहाने
हुनर
लग
गए
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Ali Mohammed Shaikh
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मैं
पागल
तो
नहीं
कोई
किसी
के
प्यार
में
दे
दूँ
खरा
सोना
है
दिल
मेरा
,
इसे
भंगार
में
दे
दूँ?
Ali Mohammed Shaikh
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