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Ali Mohammed Shaikh
is se pahle ke mere dil se utar jaa.e tu
is se pahle ke mere dil se utar jaa.e tu | इस से पहले के मेरे दिल से उतर जाए तू
- Ali Mohammed Shaikh
इस
से
पहले
के
मेरे
दिल
से
उतर
जाए
तू
दूर
नज़रों
से
भला
है
के
गुज़र
जाए
तू
मैं
तो
दरिया
हूँ
मेरी
तह
में
तेरा
काम
है
क्या
तू
हवा
है
तो
तेरी
मर्ज़ी
जिधर
जाए
तू
- Ali Mohammed Shaikh
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मैंने
चाहा
भी
कि
फिर
इस
संग-दिल
पे
फूल
उगे
पर
तुम्हारी
रुख़्सती
के
बाद
ये
होता
नहीं
Siddharth Saaz
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गुलाब
टहनी
से
टूटा
ज़मीन
पर
न
गिरा
करिश्में
तेज़
हवा
के
समझ
से
बाहर
हैं
Shahryar
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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नाम
लिख
लिख
के
तिरा
फूल
बनाने
वाला
आज
फिर
शबनमीं
आँखों
से
वरक़
धोता
है
Ghulam Mohammad Qasir
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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ईद
पर
सब
फूल
लेकर
आ
रहे
हैं
हो
गए
हैं
ज़िंदगी
के
ख़त्म
रमज़ान
Aves Sayyad
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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फूल
के
होंठों
से
ख़ुश्बू
के
मआनी
सुनकर
अपना
शे'र
अच्छा
लगा
तेरी
ज़ुबानी
सुनकर
Rajesh Reddy
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यक़ीन
हो
तो
कोई
रास्ता
निकलता
है
हवा
की
ओट
भी
ले
कर
चराग़
जलता
है
Manzoor Hashmi
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सिवा
तस्वीर
के
तेरी
,हमारे
पास
कुछ
होगा
तलाशी
ले
के
ले
जाओ
तुम्हारा
खास
कुछ
होगा
Ali Mohammed Shaikh
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देख
रहे
हो
ख़ामोशी
जो
तूफ़ानों
का
इशारा
है
अब
जो
साथ
मुसीबत
में
है
वो
ही
दोस्त
हमारा
है
Ali Mohammed Shaikh
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जिए
हर
घड़ी
जो
किसी
के
लिए
हमारी
ग़ज़ल
है
उसी
के
लिए
बटे
होंगे
जब
तक
हमारे
मकाँ
झगड़ते
रहेंगे
गली
के
लिए
दिवाना
समझती
है
दुनिया
उसे
लड़े
जो
अकेले
सभी
के
लिए
ख़ता
कुछ
हमारी
समझ
की
भी
है
धुएँ
को
चुना
रोशनी
के
लिए
सुना
जाएँ
कोई
लतीफा
हमें
है
तरसे
हुए
लब
हँसी
के
लिए
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Ali Mohammed Shaikh
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दिन
ब
दिन
पहले
से
भी
और
खिल
के
आई
हो
सच
बताना
आज
फिर
किस
से
मिलके
आई
हो
दर्जी
वाले
चौक
पर
तो
कल
से
है
बंदिश
लगी
अब
न
कहना
तुम
वहा
से
कपड़े
सिल
के
आई
हो
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Ali Mohammed Shaikh
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जब
से
तेरी
निगाह
में
सजने
लगे
है
हम
ख़ुद
को
बड़ा
हसीन
समझने
लगे
है
हम
Ali Mohammed Shaikh
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