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Ali Mohammed Shaikh
saamne vo nazar ke rahe is li.e
saamne vo nazar ke rahe is li.e | सामने वो नज़र के रहे इस लिए
- Ali Mohammed Shaikh
सामने
वो
नज़र
के
रहे
इस
लिए
उसकी
बस्ती
में
ही
काम
पर
लग
गए
वो
तो
आया
नहीं
हाथ
मेरे
मगर
हाथ
इसके
बहाने
हुनर
लग
गए
- Ali Mohammed Shaikh
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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सारी
दुनिया
ने
तो
नफ़रत
से
पुकारा
मुझको
माँ
समझती
है
मगर
आँख
का
तारा
मुझको
Muneer shehryaar
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तेरी
निगाह-ए-नाज़
से
छूटे
हुए
दरख़्त
मर
जाएँ
क्या
करें
बता
सूखे
हुए
दरख़्त
हैरत
है
पेड़
नीम
के
देने
लगे
हैं
आम
पगला
गए
हैं
आपके
चू
में
हुए
दरख़्त
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Varun Anand
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ये
इम्तियाज़
ज़रूरी
है
अब
इबादत
में
वही
दु'आ
जो
नज़र
कर
रही
है
लब
भी
करें
Abhishek shukla
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सुखा
ली
सबने
ही
आँखें
हवा
ए
ज़िन्दगी
से
यहाँ
अब
भी
वही
रोना
रुलाना
चल
रहा
है
Farhat Ehsaas
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तिलिस्म-ए-यार
ये
पहलू
निकाल
लेता
है
कि
पत्थरों
से
भी
ख़ुशबू
निकाल
लेता
है
है
बे-लिहाज़
कुछ
ऐसा
की
आँख
लगते
ही
वो
सर
के
नीचे
से
बाजू
निकाल
लेता
है
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Tehzeeb Hafi
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जब
मिली
आँख
होश
खो
बैठे
कितने
हाज़िर
जवाब
हैं
हम
लोग
Jigar Moradabadi
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किसी
की
बर्क़-ए-नज़र
से
न
बिजलियों
से
जले
कुछ
इस
तरह
की
हो
ता'मीर
आशियाने
की
Anwar Taban
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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जिस
पर
हमारी
आँख
ने
मोती
बिछाए
रात
भर
भेजा
वही
काग़ज़
उसे
हम
ने
लिखा
कुछ
भी
नहीं
Bashir Badr
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मेरी
नज़रे
उठी
उठी,
तेरी
नज़रें
झूकी
झुकी
तोल
रहे
हैं
प्यार
को
जैसे
दो
पैमानों
में
Ali Mohammed Shaikh
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मैं
पागल
तो
नहीं
कोई
किसी
के
प्यार
में
दे
दूँ
खरा
सोना
है
दिल
मेरा
,
इसे
भंगार
में
दे
दूँ?
Ali Mohammed Shaikh
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बोलता
हूँ
तो
दुनिया
रंजिशे
जताती
हैं
चुप
रहूँ
तो
लोगों
को
वहशतें
सताती
हैं
Ali Mohammed Shaikh
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तेरी
नज़र
से
कोई
रोज़
जख्मी
होता
है
ख़याल
रखना
किसी
दिन
वो
मारा
न
जाएँ
Ali Mohammed Shaikh
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देर
से
ही
आ
गया
हम
को
दुनिया
का
चलन
झूठ
भी
कहते
नहीं
और
सदाकत
छोड़
दी
Ali Mohammed Shaikh
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