tumhaare ejaz-e-husn ki mere dil pe laakhon inaayaten hain | तुम्हारे ए'जाज़-ए-हुस्न की मेरे दिल पे लाखों इनायतें हैं

  - Ali Sardar Jafri
तुम्हारेए'जाज़-ए-हुस्नकीमेरेदिलपेलाखोंइनायतेंहैं
तुम्हारीहीदेनमेरेज़ौक़-ए-नज़रकीसारीलताफ़तेंहैं
जवाँहैसूरजजबींपेजिसकेतुम्हारेमाथेकीरौशनीहै
सहरहसींहैकिउसकेरुख़परतुम्हारेरुख़कीसबाहतेंहैं
मैंजिनबहारोंकीपरवरिशकररहाहूँज़िंदान-ए-ग़ममेंहमदम
किसीकेगेसू-ओ-चश्म-ओ-रुख़सार-ओ-लबकीरंगींहिकायतेंहैं
जानेछलकाएजामकितनेजानेकितनेसुबूउछाले
मगरमिरीतिश्नगीकिअबभीतिरीनज़रसेशिकायतेंहैं
मैंअपनीआँखोंमेंसैल-ए-अश्क-ए-रवाँनहींबिजलियाँलिएहूँ
जोसर-बुलंदऔरग़यूरहैंअहल-ए-ग़मयेउनकीरिवायतेंहैं
मैंरातकीगोदमेंसितारेनहींशरारेबिखेरताहूँ
सहरकेदिलमेंजोअपनेअश्कोंसेबोरहाहूँबगावतेंहैं
येशाइ'री-ए-नौकीपैग़म्बरीज़मानेकीदावरीहै
लबोंपेमेरेसहीफ़ा-ए-इन्क़िलाबकीसुर्ख़आयतेंहैं
  - Ali Sardar Jafri
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