ik subh hai jo hui nahin hai | इक सुब्ह है जो हुई नहीं है

  - Ali Sardar Jafri
इकसुब्हहैजोहुईनहींहै
इकरातहैजोकटीनहींहै
मक़्तूलोंकाक़हतपड़जाए
क़ातिलकीकहींकमीनहींहै
वीरानोंसेरहीहैआवाज़
तख़्लीक़-ए-जुनूँरुकीनहींहै
हैऔरहीकारोबार-ए-मस्ती
जीलेनातोज़िंदगीनहींहै
साक़ीसेजोजामलेबढ़कर
वोतिश्नगीतिश्नगीनहींहै
आशिक़-कुशीफ़रेब-कारी
येशेवा-ए-दिलबरीनहींहै
भूखोंकीनिगाहमेंहैबिजली
येबर्क़अभीगिरीनहींहै
दिलमेंजोजलाईथीकिसीने
वोशम-ए-तरबबुझीनहींहै
इकधूपसीहैजोज़ेर-ए-मिज़्गाँ
वोआँखअभीउठीनहींहै
हैंकामबहुतअभीकिदुनिया
शाइस्ता-ए-आदमीनहींहै
हररंगकेचुकेहैंफ़िरऔन
लेकिनयेजबींझुकीनहींहै
  - Ali Sardar Jafri
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