utha na parda-e-hairat rukh-nihaan se abhii | उठा न पर्दा-ए-हैरत रुख़-निहाँ से अभी

  - Ali Minai
उठापर्दा-ए-हैरतरुख़-निहाँसेअभी
मिरेयक़ीनकोफ़ुर्सतनहींगुमाँसेअभी
खोलमुझपेपुर-असरारज़ुल्मतोंकेतिलिस्म
बहलरहीहैनज़रमाह-ओ-कहकशाँसेअभी
सुनाज़मज़मा-ए-रूह-काएनातमुझे
किरहीहैसदामेरेसाज़-ए-जाँसेअभी
अभीसेदेमुझेमंज़िल-ए-अदमकासुराग़
गुज़ररहाहूँमैंहस्तीकेइम्तिहाँसेअभी
दिखाख़्वाबकिसीआलम-ए-दिगरकेमुझे
किमेरादिलनहींफ़ारिग़इसीजहाँसेअभी
करहक़ीक़त-ए-हस्तीसेआश्नामुझको
किरब्तहैमुझेइसवह्म-ए-राएगाँसेअभी
बनारहाहूँज़मींपरसनम-कदेअपने
सदाएँदेमुझेबाम-ए-आसमाँसेअभी
मक़ाम-ए-होशभीमेरीनज़रमेंहैलेकिन
सुबूहैपुरमिरासहबा-ए-अर्ग़वाँसेअभी
भड़करहाहैअभीशो'ला-ए-नफ़समेरा
लपकरहेहैंशरारेमिरीज़बाँसेअभी
हैज़र्राज़र्रातपाँदश्त-ए-आरज़ूकामिरे
उठेंगेऔरबगूलेबहुतयहाँसेअभी
फ़नाक़ुबूलहोक्यूँँकरमुझेकिरिश्ता-ए-दिल
बँधाहुआहैतमन्ना-ए-जाविदाँसेअभी
  - Ali Minai
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