patte mire chaman se utha le gaii hawa | पत्ते मिरे चमन से उठा ले गई हवा

  - Ali Minai
पत्तेमिरेचमनसेउठालेगईहवा
हरयादफ़स्ल-ए-गुलकीउड़ालेगईहवा
सरसब्ज़मौसमोंकीबशारतसुनाकेआज
बे-बर्गटहनियोंकीदु'आलेगईहवा
ठहरीजोउसहसींकेसिरहानेज़रासीदेर
मौज-ए-नफ़ससेरमकीअदालेगईहवा
हरशाख़परगुलाबखिलातीचलीगई
जिससम्तउसकीबू-ए-क़बालेगईहवा
अहल-ए-हरमकीमुर्दा-दिलीकेइलाजको
कू-ए-बुताँसेख़ाक-ए-शिफ़ालेगईहवा
आसूदगान-ए-गुलशन-ए-बर्ग-ओ-नवाकेनाम
फ़र्याद-ए-मुर्ग़-ए-क़िबला-नुमालेगईहवा
तारीकबस्तियोंमेंयेक्याढूँढतीहैअब
ज़ौहरचराग़सेतूचुरालेगईहवा
सुनतेयेहैंकिक़स्र-ए-सुलैमाँकीख़ाकको
आख़िरउड़ाकेसू-ए-सबालेगईहवा
  - Ali Minai
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy