bazm-e-rang-o-noor men sahib-nazar koi nahin | बज़म-ए-रंग-ओ-नूर में साहिब-नज़र कोई नहीं

  - Ali Minai
बज़म-ए-रंग-ओ-नूरमेंसाहिब-नज़रकोईनहीं
देखनेवालेबहुतहैंदीदा-वरकोईनहीं
हमकोविर्सेमेंमिलाहैवोमकाँअज्दादसे
जिसमेंदीवारेंहीदीवारेंहैंदरकोईनहीं
हरगलीकूचेमेंअबशम्स-ओ-क़मरबिकनेलगे
अबख़रीदार-चिराग़-ए-चशम-तरकोईनहीं
यूँँतख़य्युलमेंहक़ाएक़कीमिलावटहोगई
अबफ़सानोंमेंभीहर्फ़-ए-मो'तबरकोईनहीं
मैंनईमंज़िलकोनिकलाहूँपुरानीराहपर
मेरेहमराहीबहुतहैंहम-सफ़रकोईनहीं
अहल-ए-दिलतोख़ैरसबसूद-ओ-ज़ियाँमेंपड़गए
क्याख़िरद-मंदोंमेंभीआशुफ़्ता-सरकोईनहीं
  - Ali Minai
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