rakhna ho to dil ko nigah-e-yaar men rakhna | रखना हो तो दिल को निगह-ए-यार में रखना

  - Ali Minai
रखनाहोतोदिलकोनिगह-ए-यारमेंरखना
इसजिंस-ए-गिरामीकोबाज़ारमेंरखना
हमअहल-ए-तमन्नाकीबसइतनीहैकरामत
इकख़्वाबसदादीदा-ए-बेदारमेंरखना
अंजाम-ए-तरबभीतोतअस्सुफ़हैसोइसबार
ख़ुशियोंकोभीतख़्मीना-ए-आज़ारमेंरखना
अबघरजोबनानाकोईख़्वाबोंकीज़मींपर
इमकान-तग़य्युरदर-ओ-दीवारमेंरखना
नाहक़किसीमज़लूमपरउट्ठेतोलचकजाए
येजौहर-ए-नायाबभीतलवारमेंरखना
येकियाकिहरइकदिलमेंजगानातलब-ए-हुस्न
औरख़ुदकोनिहाँपर्दा-ए-असरारमेंरखना
  - Ali Minai
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy