lahu men apne sar-e-shaam jal bujha suraj | लहू में अपने सर-ए-शाम जल बुझा सूरज

  - Ali Minai
लहूमेंअपनेसर-ए-शामजलबुझासूरज
इकइस्तिआ'रामिरीआरज़ूकाथासूरज
हैउम्र-भरकीरिफ़ाक़तमगरमिरेग़मसे
आश्नाहैंसितारेआश्नासूरज
इकऐसादौरभीगुज़रातिरीलगनमेंकिजब
मिरीजबींपेसितारेथेज़ेर-ए-पासूरज
येमुझकोकैसेअँधेरोंमेंलाकेछोड़गया
मिरेजहान-ए-तरबकागुरेज़पासूरज
सुनाहैआइनेसूरजकेहैंमह-ओ-पर्वीं
मैंसोचताहूँकिहैकिसकाआइनासूरज
हमारेअहदमेंमिन-जुमला-ए-नुजूमसही
रहाहैअपनेज़मानेमेंदेवतासूरज
शब-ए-सियहकीपुर-असरारकार-गाहोंमें
सहरतराशरहीहैकोईनयासूरज
हरएकज़र्रेमेंहैबाज़-गश्त-ए-नूर-ए-अज़ल
ज़मींकीख़ाकमेंज़महैंहज़ार-हासूरज
  - Ali Minai
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