khayal-o-khwaab ke paikar badalte rahte hain | ख़याल-ओ-ख़्वाब के पैकर बदलते रहते हैं

  - Ali Minai
ख़याल-ओ-ख़्वाबकेपैकरबदलतेरहतेहैं
दिलआइनाहोतोमंज़रबदलतेरहतेहैं
हमारेहालसेमतकरक़यास-ए-नाकामी
किसर-फिरोंकेमुक़द्दरबदलतेरहतेहैं
उलझजाएकहींबाम-ओ-दरमेंरिश्ता-ए-ज़ीस्त
इसएहतिमालसेहमघरबदलतेरहतेहैं
हरइल्तिफ़ातहैताज़ाजराहतोंकीनवीद
किचारा-गरमिरेनश्तरबदलतेरहतेहैं
भलायक़ींकोमुयस्सरहैकबगुमाँसेनजात
किसाहिलोंकोसमुंदरबदलतेरहतेहैं
असास-ए-मेहर-ओ-मोहब्बतनहींबदलतीकभी
अगरचेलोगबराबरबदलतेरहतेहैं
वहीहैआजजोकलथीसज़ा-ए-हक़-गोई
सुतून-ए-दारपेहाँसरबदलतेरहतेहैं
मिरेवतनकीबहुतमुख़्तसरसीहैतारीख़
सितमवहीहैसितमगरबदलतेरहतेहैं
वहीहैजल्वा-ए-जानानादैरहोकिहरम
शराबएकहैसाग़रबदलतेरहतेहैं
  - Ali Minai
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